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जयपुर पिंकसिटी 

राजस्थान की राजधानी जयपुर ( पिंकसिटी ) मे आपका हार्दिक स्वागत है

 आज हम राजस्थान की राजधानी जयपुर की संपूर्ण विरासत महल,मंदिर,बाग,बगीचे एवं किलो लों के बारे में अध्यन करेंगे

 राजस्थान की राजधानी जयपुर को गुलाबी नगरी भी कहा जाता है क्योंकि रामसिंह द्वितीय द्वारा प्रिंस अल्बर्ट के आगमन के उपलक्ष्य में जयपुर में सभी इमारतों को गुलाबी गेरुआ रंग से रंगवाया था ।

 कछवाह  वंश के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा जयपुर की स्थापना 18 नवंबर 1727 को की गई थी तथा जयपुर के वास्तुकार श्री विद्याधर भट्टाचार्य थे।

 जयपुर के प्रमुख स्थल

 राजस्थान में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक जयपुर घूमने के लिए आते हैं।

आमेर -

 आमेर जयपुर नगर से करीब 10 किलोमीटर दूर दिल्ली जाने वाली सड़क पर स्थित है आमेर जयपुर राजधानी बनने से पहले राजधानी थी प्राचीन काल में यह अमरावती एवं अंबिकापुर के नाम से जाना जाता था।  आमेर महल के मुख्य द्वार के बाहर शिला माता का मंदिर है जो जयपुर के राजाओं की इष्ट देवी है महल के मुख्य द्वार में घुसते ही 20 खंभों का राजपूत भवन से लीवर बना दीवाने खास और दीवाने आम है।

 जंतर मंतर वेधशाला -

 जंतर मंतर का  निर्माण जयपुर शहर की स्थापना से पूर्व 1734 ईस्वी में करवाया गया था सवाई जयसिंह द्वारा बनाए गए इस वेधशला का अंतरराष्ट्रीय महत्व है इसका निर्माण समय की जानकारी सूर्योदय व सूर्यास्त तथा नक्षत्रों की जानकारी प्राप्त करने के लिए करवाया गया था देश में सबसे पहली वैद्य साला दिल्ली में बनवाई गई थी इसके बाद उज्जैन,बनारस,मथुरा में वैद्यसाला बनवाई।

 जयपुर की वेधशाला सबसे विशाल तथा विख्यात है

 सवाई जयसिंह द्वारा सबसे पहली वैद्यसाला दिल्ली में बनवाई गई थी।

हवामहल 

 हवामहल भारतीय राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक राजसी महल है जिसका निर्माण 1799 ईस्वी में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया जिसक वास्तुकार लालचंद उस्ता था यह एक पांच मंजिला इमारत है जो इस प्रकार है सबसे नीचे वाली शरद मंदिर, रतन मंदिर, विचित्र मंदिर,  सूर्य/ प्रकाश मंदिर, हवा मंदिर अंतिम इमारत है जो सबसे ऊपर है।

 महल में 953 नक्काशीदार झरोखे हैं इमारत का डिजाइन इस्लामिक मुगल वास्तुकला के साथ हिंदू राजपूत वास्तुकला का एक उत्कृष्ट मिश्रण को दर्शाता है बताया जाता है कि महाराज सवाई प्रताप सिंह के कृष्ण के बड़े भगत थे इनकी भक्ति महल के ढांचे के डिजाइन से प्रतीत होती है जो एकदम भगवान कृष्ण के मुख के समान दिखता है।

 जल महल

 जयपुर आमेर मार्ग जल महल नामक स्मारक के निर्माण का श्रेय सवाई जय सिंह को दिया जाता है सवाई जयसिंह ने जयपुर की जल आपूर्ति हेतु गर्भवती नदी पर बांध बनाकर मानसागर तालाब / मानसागर झील बनवाया था यह भी माना जाता है कि सवाई जयसिंह ने अश्वमेध यज्ञ में आमंत्रित ब्राह्मणों के भोजन व विश्राम की व्यवस्था इसी महल में करवाया था ।

 रामनिवास बाग

 महाराजा सवाई राम सिंह द्वारा अकाल राहत कार्यों के लिए ₹400000 की लागत ने बनाया गया यह बाग है।

 नाहरगढ़ का किला

 नाहरगढ़ किले का प्रारंभ 1734 में सवाई जयसिंह ने निर्माण करवाया था।  किंतु इसको वर्तमान स्वरूप 18 सो 68 में सवाई राम सिंह जी ने दिया आमेर से भी नारगढ़ की तरफ जाने का रास्ता है।  इस किले में ही फिल्म पद्मावत आमिर खान की फिल्म रंग दे बसंती की ज्यादातर शूटिंग तथा साथ ही सुशांत सिंह राजपूत ने भी कई फिल्मों की शूटिंग इसी नारगढ़ किले में की है ।

गेटोर

 नाहरगढ़ किले के निचे की साइड जयपुर के कछुआ राजाओं की छतरियां बनी हुई है जो सफेद संगमरमर से निर्मित है।



 

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